Nangli

Geeta Gyan

भगवद् गीता अध्याय: 5 श्लोक 5 श्लोक: यत्साङ्‍ख्यैः प्राप्यते स्थानं तद्यौगैरपि गम्यते। एकं साङ्‍ख्यं च योगं च यः पश्यति स पश्यति॥ भावार्थ: ज्ञान योगियों द्वारा

Nangli Aarti

श्री श्री गुरु महाराज जी की स्तुति

नमो सदगुरुं सचिदानन्द रूपम । नमो सदगुरुं ज्ञानदाता अनुपम ।। नमो सदगुरुं सत स्वरूपं विकासम् । नमो सदगुरुं भानुवत् सुप्रकाशम् ।। नमो सदगुरुं वृद्धि विद्या

नंगली तीर्थ

Nangli Will Hi-Tech Soon

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